जमीनी निशान ब्यान करने का तरीका

पिछले पोस्ट में हमने फील्ड क्राफ्ट के जिस विषय पे बात किआ था वह आवाज़ तथा  बेअरिंग के मेथड से  फासले का अनुमान लगाना  इस पोस्ट में हम बात करेगे “जमीनी निशान का बयान करना(jameeni nishan byan karna) “और  पहचान करने का तरतीब क्या होता है




जैसे की हम जानते है की किसी ऑपरेशन के दौरान ज़ुबानी हुकुम देने के लिए या टारगेट पर फायर डलवाने के लिए टारगेट की बयान और पहचान की ज़रूरत पड़ती है ! ऑपरेशन के दौरान इसमें अधिक मुश्किल आती है , क्यों की टारगेट को ढूढना मुश्किल होता है और कभी टारगेट कोई दिखाई भी देता है तो बहुत ही कम समय के लिए दिखाई देता है और छुप जाता है !

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इस लिए आर्म्ड फ़ोर्स में ज़मीनी निशान का बयान करने के लिए एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर  बनाया गया है ताकि कमांडर ज़मीनी निशानों का बयां जल्दी और सही कर सके और जवान उन्हें आसानी से पहचान सके !

ज़मीनी निशान का बयान करते समय उपयोग होने वाले कुछ शब्द और उनके परिभाषा( jamini nishan byan karte samay upyog hone wale kuchh shabd aur unke paribhasha)

  • आमरुख(Aamrukh ka paribhasha) :  आमरुख दूर स्तिथ वह मशहूर जमीनी निशान होता है जो दिए गए जिम्मेवारी की इलाके को दो बराबर भागो में  बाटता है और जिसके सहायता से कमांडर अपने इलाके के और निशानों को पहचान करता है  !
  • मदद का निशान(maad ka nishan paribhasha ) :पहले से मुकरर किए हुए निशान जिनकी मदद से किसी दुसरे निशान या टारगेट का ब्यान किया जाता है ! ये बाकि निशानों के वानस्पत ज्यादा मशहूर होना चाहिए !
  • ज़मीनी निशान(jamin nishan ka paribhasha) :  ये पहचान में आने वाले निशान है जिनको कमांडर ज़ुबानी हुकुम में इस्तेमाल करता है !
  • टारगेट(target ka paribhasha) : वह निशान जहा पर किसी हथियार का फायर गिराया जाता है या फायर के लिए मुकरर किआ जाता है उसे हम टारगेट कहते है !
ज़मीनी निशान देने का तरतीब(Jamini Nishan dene ka tartib) : फ़ौज की सहुलियत के लिए एक तरतीब बनाया गया है जिसके इस्तेमाल से जमीनी निशान का बयाँन  आसानी से किया जा सकता है और उस तरतीब  को शोर्ट फॉर्म में GRAD कहते है ! GRAD का फुल फॉर्म होता है G-Group( ग्रुप ), R-Range(रेंज) , A- Aid(मदद ), D-discription(विवरण)
  • Group(ग्रुप)- जिस टुकड़ी को ज़मीनी निशान दिखाना है उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए , जैसे – क्लास , सेक्शन , एलेमजी ग्रुप , ओ ग्रुप यदि ,
  • Range( रेंज )-अपनी जगह से ज़मीनी निशान जिसको दिखा रहे है उसका रेंज गज में कितना है ! रेंज कम से कम 50 गज होना चाहिए !
  • Aid(मदद)- ज़मीनी निशान को ब्यान करन के लिए जिस तरीके का मदद लिए ! अगर दिशा का मदद लिया जाए तो रेंज दिशा के बाद दी जाती है !
  • Discription(विवरण)- ज़मीनी निशान का व्यान करे ताकि देखने वालों को समझ में आ जाये ! उदहारण के लिए :-  सेक्शन,  सामने देख  500 , गाँव  का बाएँ किनारा  पर  एक पेड़ जिसका पत्ता गहरे रंग के है और उसके दाहिने एक सफ़ेद माकन है , नाम गोल पेड़ ” अगर इस ब्यान  को  GRAD पे देखे तो इस प्रकार से होगा !Group- सेक्शन , Range- सामने 500 गज , Aid- गाँव का बाया किनारा , Discription-एक पेड़ जिसका पत्ता गहरे रंग के है और उसके दाहिने एक सफ़ेद माकन है , नाम गोल पेड़!

आम रुख बयान करने का तरीका(Aamrukh byan karne ka tarika):- आम रुख भी हम GRAD के तरतीब से ही ब्यान करते है ! ज़मीनी निशान या व्यू पॉइंट ब्रीफिंग में सबसे पहले हम आम रुख ही कायम करते है ! आमरुख ब्यान करने का उदहारण (Example of aamrukh):
” सेक्शन  सामने स्काइलाइन पे एक गुम्बदनुमा पहाड़ नाम टेकरी !  खुदका पोजीशन  (own position ), टेकरी इसी की लेने दूर तक आमरुख “

आमरुख देते समय ध्यान  में रखने वाली बाते(aamrukh dete samay dhyan me rakhne wali baten) :

  • एक मशहूर ज़मीनी निशान हो 
  • अचल हो ,
  • दूर डिस्टेंस पे हो  और यदी हो सके तो स्काइलाइन पे हो 
  • यदि चौड़ाई  एक डिग्री से ज्यादा हो तो उसका एक किनरा लिया जाय !
  • दिन और रत के समय दिखाई देने वाला हो 

इस प्रकार से हम ज़मीनी निशान और आम रुख का व्यान करते है ! उम्मीद है की पोस्ट पसंद आएगा !अगर कोई  कमेंट या सजेसन हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे !और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब  करके हमलोगों को सपोर्ट करे!


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  2. फासले का अनुमान लगाना और अनुमान लगाने का तरीका
  3. चीजे क्यों दिखाई देती है टारगेट को कैसे बयान करते है ?
  4. कामोफ्लाज और कांसिल्मेंट तथा फायर कण्ट्रोल आर्डर की जानकारी
  5. कमोफ्लाज के सिद्धांत , और कामोफ्लाज करने का तरीका
  6. कोसिल्मेंट क्या है और उसका तरतीब
  7. स्टाकिंग क्या है ? और स्टाकिंग के फायदे तथा और जाननेवाली बाते !
  8. आवाज़ तथा बेअरिंग के मेथड से फासले का अनुमान लगाने का तरीका
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