सिल्वा कंपास क्या होता है और उसके पार्ट्स के नाम और काम ?

पिछले ब्लॉग पोस्ट में हमने फील्ड स्केच के बारे  में जानकारी प्राप्त किया और इस पोस्ट में हम जानकारी सिल्वा कंपास मॉडल-54 (Silva Compass Model-54)के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे !



जैसे की हम जानते है की काफी समय से सशस्त्र फाॅर्स के जवान जब एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाने के लिए मैप रीडिंग के अभ्यासों के लिए सर्विस प्रिस्माटिक कंपास(Service Prismatic Compass) इस्तेमाल होता है लेकिन आज के आधुनिक युग के स्वीडन कंपनी ने सशस्त्र सेना के जवानों के जरुरत को ध्यान में रखते हुए हल्का व आधुनिक सिल्वा कंपास मॉडल -54 बनाया !


इस ब्लॉग को सब्सक्राइब ऐसे कर सकते है 


इस ब्लॉग पोस्ट को आगे पढने से पहले मै अपने पाठको से यह अनुरोध करूँगा की अगर आप ने मेरा ब्लॉग सब्सक्राइब और फॉलो नहीं किये हो तो उसे सब्सक्राइब और फॉलो करले वह बहुत ही आसान है और मेरे इस पोस्ट को लाइक और शेयर करे !


जरुर पढ़े:दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका


इस ब्लॉग पोस्ट को पढने के बाद इन विषयों के बारे में जान पायेगे :

Silva Compass model-54 ke parts ka name
Silva Compass model-54

1. सिल्वा कंपास मॉडल -54 क्या है ?(Silva Compass model-54 kya hai)
2. सिल्वा कंपास के हिस्से के नाम व काम क्या है ?(Silva compass ke hisse ke name aur uska kam)


1. सिल्वा कंपास मॉडल -54 क्या है ?(Silva Compass model-54 kya hai): यह आयातकर बेस प्लेट  पर सेट किया हुवा गोल डिबिया के आकर का प्लास्टिक से बना ऐसा यंत्र है जिसके सहायता से मैप और जमीन पर बेअरिंग पढ़ सकते है व बेअरिंग की लाइन खीच सकते है ! यह स्वीडन का बना हुवा है !


2. सिल्वा कंपास के हिस्से के नाम व काम क्या है ?(Silva compass ke hisse ke name aur uska kam): सिल्वा कंपास के हिस्सों  को हम  दो भाग में बाँट सकते है जो निम्न है ;


जरुर पढ़े:कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका


(a) बेस प्लेट(Base Plate) : कंपास इसके ऊपर सेट किया गया है ! डिग्रिय पढ़ते समय व मैप पर काम करते समय बेस प्लेट को जमीन के सामानांतर रखा जाता है ! बेस प्लेट प्लेट पर निम्न जानकारी होती है :

  • रोमर(Romar) : 1/25000, 1/50000, व 1/63360 की स्केल के रोमर बने होते है ! जिसकी सहायता से इन स्केल के मैपो पर 4,6,व 8 फिगर जी आर(G.R.) मालूम कर सकते है !
  • मैगनिफाई गिलास(Magnify Glass) : ये ट्रेवलिंग एरो के पीछे होता है , इसकी सहायता से मैप की छोटी डिटेल्स को आसानी से देख सकते है !
  • स्केल(Scale) : इसके एक साइड में 100 mm व दूसरी तरफ 2 इंच दुरी की स्केल बनी होती है !
  • ट्रेवलिंग एरो(Taveling arrow) : कंपास सेट करने के बाद ट्रेवलिंग एरो जिधर इशारा करेगा उसी दिशा में मार्च करते है ! यह मैगनिफाई गिलास के ऊपर होता है !
  • सिल्कोन ग्रिप फिट(Silicon grip fit) : ये बेस प्लेट के निचे लगे हुए होते है ! ये कंपास को निचे के सतह पर स्लिप होने से बचाता है !
  • लुमिनस स्ट्रिप(Luminus strip) : ये ट्रेवलिंग एरो के आगे लगी होती है रात को मार्च करते समय चमकती है !

(b) कंपास हाउसिंग(Compass Housing) : कंपास हाउसिंग बेस प्लेट के ऊपर सेट किया हुवा है जो चारो तरफ घुमाया जा सकता है ! इसके ऊपर व निचे निम्नलिखित जानकारी दिया होता है :

  • ग्रेडयुसन स्केल(Gradution scale) : टरनेबल कंपास हाउसिंग के ऊपर  चार बड़ी दिशाए जो N, S, E, W लिखी हुई है ! जो 360, 180, 90 व 270 डिग्री  जाहिर करती है !बाकि 20-20 डिग्रियों के निशान व अंक लिखे होते है !10 की डिग्री जाहिर करने के लिए दोनों अंको के बिच एक लम्बी लाइन दर्शया गया होता है !एक बड़े अंक से लेकर एक बड़ी लाइन के बिच पांच भाग किये गए होते है !जो एक भाग दो डिग्री को दर्शाता है !इन्ही के सहायता से मैप पर डिग्रिया  पढ़ते है तथा एक स्थान से दुसरे स्थान तक मार्च करने के लिए डिग्री सेट करते है !
  • लेंस(Lense) : यह रोटेटिंग हाउसिंग के ऊपर कैप्सूल के साइड में होता है इसकी सहायता से ऑप्टिकल साईट सिस्टम से किसी भी जमीनी निशान की फॉरवर्ड और बेक बेअरिंग एक साथ पढ़ सकते है !
  • साईटिंग लाइन(Sighting line) : यह हाउसिंग के क्पसुल के साइड में तथा लेंस के सामने होती है ! इसकी सहायता से जमीनी निशानों की डिग्रिया  पढ़ी जाती है !
  • नार्थ -साउथ लाइन और नार्थ एरो (North South line and North arrow): यह कंपास हाउसिंग के निचे लाल और काले रंग की होती है इनके बिच में एक एरो होता है ! जिसका लाल रंग उतर और कला रंग दक्षिण को दर्शाता है ! मैप पर डिग्रिया  पढ़ते समय लाल भाग मैप के शीर्षक की तरफ रखते हुए मैप की ईस्टिंग लाइन के समानांतर रखते है उसके बाद डिग्रि मालूम की जाती है !
  • कंपास डायल/कार्ड(Compass dail/card) : यह कंपास हाउसिंग के बिच में एक धुरी पर सेट है इसके ऊपर एक लाल रंग का तीर का निशान है जिस पर N लिखा हुवा है जो उत्तार दिशा को दर्शाता है बाकि उसके निचे S दाहिने E तथा बाए W जो क्रमशः दक्षिण , पूर्व तथा पश्चिम दिशाओ को दर्शाता है !इसके एरो के बहार की तरफ एक सर्किल में मोटे व छोटे अंको में उलटी डिग्रिया लिखी होती है जो घडी के सुलटे रुख में बढती है !
  • इंडेक्स लाइन(Index line) : यह कोमप्स हाउसिंग के निचे एवं त्रवेलिन एरो के पीछे एक वृत्त पर खिची गई होती है जिसके दोनों तरफ लुमिन्स लगाया गया रहता है जो रात को चमकता है इसकी मदद से कंपास के दी हुई डिग्री पर सेट किया जाता है व मैप पर (सिल्वा सिस्टम ) डिग्री पढ़ी जाती है !
  • प्रिज्म(Prizm) : यह कंपास हाउसिंग के अन्दर की तरफ व लेंस के सामने होता है ! साईटिंग सिस्टम से बेअरिंग पढ़ते समय डायल पर लिखी उलटी डिग्रियों को सीधी करके दिखता है !
  • पिवोट/धुरी(Pivot) : यह कंपास हाउसिंग के बिच में होती है ! कंपास डायल इसी धुरी के चारो तरफ घूमता है !
इस प्रकार से यहाँ सिल्वा कंपास और उसके हिस्से पुरजो का नाम और काम से सम्बन्धित यह ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई !उम्मीद है की ये पोस्ट पसंद आएगा ! अगर कोई कमेंट हो तो निचे के कमेंट बॉक्स में जरुर लिखे  और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब तथा फेसबुक पेज  लाइक करके हमलोगों को और प्रोतोसाहित करे बेहतर लिखने के लिए !

इन्हें  भी  पढ़े :
  1. मैप रीडिंग में दिशाओ के प्रकार और उत्तर दिशा का महत्व
  2. दिन के समय उत्तर दिशा मालूम करने का तरीका
  3. कन्वेंशनल सिग्न ,कन्वेंशनल सिग्न के प्रकार , कन्वेंशनल सिग्न बनाने का तरीका
  4. रात के समय उत्तर मालूम करने का तरीका
  5. सर्विस प्रोटेक्टर का परिभाषा और सर्विस प्रोटेक्टर का प्रकार
  6. सर्विस प्रोटेक्टर का उपयोग और सर्विस प्रोटेक्टर से बेक बेअरिंग पढने का तरीका
  7. 13 तरीके मैप सेट करने का !
  8. 5 तरीका मैप पे ऊपर खुद का पोजीशन को पता करने का
  9. 5 तरीको से मैप टू ग्राउंड और ग्राउंड टू माप जाने
  10. मैप रीडिंग के उद्देश्य तथा मैप रीडिंग के महत्व

Leave a Reply

Shopping cart

0
image/svg+xml

No products in the cart.

Continue Shopping