हथियार फायरिंग के समय मार्क्स मैन के बेसिक उसूल तथा फायरिंग पोजीशन में ध्यान देनेवाली बाते

पिछले ब्लॉक पोस्ट में हमने फायरिंग रेंज के सुरक्षित फायरिंग करने के उसूल के बारे में जानकारी प्राप्त की और इस नए ब्लॉग पोस्ट में हम मार्क्समैन   बेसिक उसूल के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे

जब कभी भी हम किसी से प्यार करते हैं तो फायर करने से पहले हमें अपनी पोजीशन को दुरुस्त बनानी चाहिए जिससे कि हम टारगेट को अच्छे से इंगेज कर सके और बर्बाद कर सकते हैं ज्यादातर अवस्था में हम जिस पोजीशन  से फायर  करते हैं वह  हालात के अनुसार बनाया गया पोजीशन होता है। फिर भी अगर हम एक अच्छे फायर के बुनियादी उसूलों के बारे में जानकारी ज्ञात और अभ्यास  करें तो हम किसी भी परिस्थिति में एक अच्छे फायर साबित हो सकते हैं। 

अच्छे  फायरर  का सिद्धांत : एक अच्छे फायरर बन्ने के कुछ बुनियादी उसूल एस प्रकार से है :

  •  पोजीशन और राइफल पर पकड़ अच्छी होनी चाहिए जिसे के वेपों को अच्छा सपोर्ट  दे सके 
  • वेपोन कुदरती टारगेट की तरफ पॉइंटेड होना चाहिए बिना किसी फिजिकल ऍफ़र्ट्स
  • साईट एलाइनमेंट और साईट पिक्चर दुरुस्त होना चाहिए 
  • पोजीशन को बिना डिस्टर्ब किये हुए फायर किया गया शॉट को फॉलो करना चाहिए 

मुख्य बाते मार्क्समैन  बनाने के सिद्धांत का :मार्क्स मैन(Marksman)या एक अच्छे फायरर बन्ने के सिद्धांत को अमल में लेन के लिए निम्नलिखत 9 मुख्य बाते है जिसे फायरिंग के दौरान अमल में लेन से एक अच्छे फायरर बन सकते है :

  • पैर  का पोजीशन 
  • बट पोजीशन 
  • लेफ्ट हैण्ड पोजीशन 
  • बायीं केहुनी का पोजीशन 
  • दाहिना हाथ का ग्रिप 
  • दाहिना केहुनी पोजीशन 
  • सर का पोजीशन 
  • आराम पोजीशन
  • साँस  लेने की पोजीशन 

1. पैर का पोजीशन(Firing ke samay Leg position) :पैर का दो पोजीशन होता है जिसे हम फायरिंग के दौरान अख्तियार कर सकते है और इन पोसितिओंस का अपना बेनेफिट्स और इन पोजीशन को हम अलग अलग हालत में ख्तियर कर सकते है !

पैर का पोजीशन-1 

Marksman Leg position-1
Leg position-1

इस पोजीशन में शारीर टारगेट के रफली टारगेट के सीध में रहती है जिसमे पैर कंधे के चौड़ाई में खुली रहती है और अंगूठा बहार पॉइंट किया हुवा ! दाहिना पैर भी रफ्ली राइफल के साथ इन लाइन जो की राइफल के रेकोइल को रोकता है और बॉडी पोजीशन को स्इथिर बनाने में मदद करेगी !लेग पोजीशन के ऊपर यह निर्भर करता है की चेस्ट  पोजीशन छोटा बनेंगा !  




पैर का पोजीशन-2

Marksman Leg position-2
Leg position-2

यह एक क्लासिक पोजीशन है इसमें बॉडी अलिग्नेमेंट थोडा लेफ्ट रहता है फायरिंग लाइन से और दाहिना घुटना बेंत रहता ! इस पोजीशन में चेस्ट ग्राउंड से ऊपर रहता है जिससे प्रेस रिलीज़ हो जाता है चेस्ट से और साँस लेने में आसानी होती है !इस पोजीशन से हाई और अच्छी सपोर्ट फायरिंग पोजीशन बनती है !


 

2. बट पोजीशन(Firing ke samay  rifle butt position) :

राइफल बट की पोजीशन कंधे पे इस प्रकार होना चाहिए की  फायरिंग पोजीशन में स्थिरता के साथ साथ रेकोइल को कम करे फायरिंग के दौरान और बट को कंधे से स्लिप होने से रोके . इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की बूट कालर बोने के ऊपर नहीं रखा जाये और हब्बर शके के स्ट्राइप या किसी हार्ड ऑब्जेक्ट के ऊपर न रखा जाय !. बट कंधे के निचे या ज्यादा ऊपर नहीं होना चाहिए बल्कि कंधे के अन्दर मांस वाले हिन्स्से पे रेस्ट करना चाहिए और इस प्रकार से होना चाहिए जिससे के सर को सीधा और ऊपर रख सके !

3. बाए हाथ की ग्रिप(Firing ke samay left hand grip) :

Rifle Left hand Grip
Left hand Grip

बाया हाथ राइफल के लिए रेस्ट है और राइफल के ऊपर पकड़ अकाद के साथ नहीं होना चाहिए बल्कि साधारण जैसे की आभुशरण को पकड़ते है . पकड़ को ज्यादा सख्त नहीं बनाना चाहिए और राइफल को पीछे की तरफ नहीं खीचना चाहिए !




4. बाए केहुनी का पोजीशन(Firing ke samay left elbow position)  : बाए हाथ केहुनी की पोजीशन इस पराक्र से होना चाहिए की हाथ की हड्डिय राइफल को सपोर्ट करे . प्रोन उन सपोर्टेड पोजीशन में बाए हाथ की केहुनी राइफल के सेण्टर लाइन के नजदीक होना चाहिए जिससे की फोरे आर्म की हड्डिय राइफल को सपोर्ट करने में आरामदाय पोजीशन बनाये !

5. दाहिने हाथ की पकड़(Firing ke samay right hand grip) :

दाहिना हाथ कंट्रोलिंग हाथ होता है  लेकिन इसका भी ग्रिप ज्यादा सख्त नहीं होना चाहिए ! दाहिना हाथ का पकड़ इसप्रकार से होना चाहिए जैसे की पानी का ग्लास को पकड़ के रखे हो और इतना सख्त हो की ग्लास हाथ से फिसल न सके ! पकड़ इसना सख्त होना चाहिए जिससे की अंगुलियो पर स्ट्रें . अंगुलियो की पकड़ इस प्रकार से होना चाहिए की अंगूठा और फोरे फिन्गुरे पिस्टल ग्रिप के ऊपर से हो और इंडेक्स फिंगर आउटसाइड ट्रिगर हो जब आप फायर नहीं कर रहे हो तब  बाकी अंगुलिया ट्रिगर के चारो ओर .!

6. दाहिने हाथ की केहुनी की पोजीशन(Firing ke samay right elbow position) :

दाहिना हाथ को पिस्टल ग्रिप पे पकडे हुए केहुनी को ग्राउंड पे लगाये और नेचुरल फीलिंग को महसूस करे !केहुनी को जमीन पे लगाने के बाद राइफल के ऊपर पीछे के तरफ कंधे में  दबा के रखे ! ज्यादा जोर से न दबाये बल्कि पीछे की तरफ एक फर्म दबाव बना के रखे 

7. सर का पोजीशन (Firing ke samay head position) :

राइफल के बट को कंधे के ऊपर वाले भाग में रखते हुवे सर को राइफल के ऊपर रेस्ट करे जिसमे गाल राइफल के चिक पीेछे के ऊपर हो !सर सीधा ऊपर की तरफ और सही साईट एलाइनमेंट के साथ सर के बैक साईट से 25 mm दूर रखे !अगर सर ज्यादा दूर या नजदीक हो तो उसका एडजस्टमेंट करे .

8.आरामदायक पोजीशन (Firing ke samay relaxation position)

अगर आप का पोजीशन आरामदायक नहीं है तो आप राइफल को पकड़ने में विशेष बल का प्रोयोग करेंगे जो की आप के फायरिंग के ऊपर प्रभाव डालेगी इसलिए जहा तक हो सके पोजीशन आरामदायक होने चाहए अगर केहुनी के निचे कोई कंकड़ या पत्थर हो उसे साफ कर दे !ऊपर बताये गए सभी पॉइंट को बरी बरी से अभ्यास करे !

9.साँस लेने की तकनीक (Firing ke samay Breathing control)

Breathing control
Breathing control

फायरिंग के समय साँस के ऊपर विशेष कण्ट्रोल रखनी चाहिए विशेषकर ट्रिगर ऑपरेशन के समय ! फायरिंग के समय जब हम साँस लेते है तो देखते है की राइफल की बारेल भी ऊपर निचे मूवमेंट कर रही है इसलिए यह जरुरी है की साँस के ऊपर कण्ट्रोल रखा जाये और ट्रिगर ऑपरेशन के समय पहले साँस को अपने लंग्स में पूरी तरह से भर ले और ट्रिगर दबाते समय साँस को पूरी तरह से रोक के रखे 

इसके साथ ही फायरिंग रेंज के सुरक्षात्मक करवाई  से सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट समाप्त हुई ! उम्मीद है की आपलोगों के ए पोस्ट पसंद आएगी !इस ब्लॉग को सब्सक्राइब या फेसबुक पेज को लाइक करके हमलोगों को प्रोतोसाहित करे!

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  10. खुली लाइन और निकट लाइन चल

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